राधे-राधे प्यारे साथियों! आप सभी जानते हैं कि साल में कई एकादशियां आती हैं, लेकिन उत्पन्ना एकादशी का अपना ही खास महत्व होता है। इसे मार्गशीर्ष या अगहन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि इसी दिन से एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी, इसलिए यह व्रत बहुत शुभ माना गया है।
उत्पन्ना एकादशी कब है?
इस साल उत्पन्ना एकादशी 2025 में 15 नवंबर, शनिवार के दिन पड़ेगी। यह तिथि 14 नवंबर की रात 12:50 बजे से शुरू होकर 16 नवंबर की सुबह 2:37 बजे तक रहेगी। इसलिए व्रत 15 नवंबर, शनिवार को रखा जाएगा।
उत्पन्ना एकादशी व्रत पारण कब करना है?
व्रत का पारण (व्रत खोलना) 16 नवंबर, रविवार को किया जाएगा।
व्रत का पारण 16 नवंबर, रविवार सुबह 7:15 बजे से 8:45 बजे के बीच व्रत खोलना सबसे शुभ रहेगा। अगर सुबह का समय न मिल पाए, तो दोपहर में 1:10 से 3:18 बजे के बीच भी पारण कर सकते हैं।
उत्पन्ना एकादशी व्रत कैसे करें?
- दशमी के दिन (14 नवंबर) – एक समय भोजन करें। लहसुन, प्याज और चावल का सेवन न करें। तुलसी पत्र पहले से रख लें।
- एकादशी के दिन (15 नवंबर) – सुबह स्नान करें, भगवान विष्णु की पूजा करें। दिनभर फलाहार करें या निर्जला व्रत रखें। भगवान विष्णु के नाम का जाप करें और एकादशी कथा सुनें।
- द्वादशी के दिन (16 नवंबर) – शुभ मुहूर्त में व्रत खोलें और भगवान को चावल का भोग लगाएं।
उत्पन्ना एकादशी का महत्व
शास्त्रों में बताया गया है कि इसी दिन एकादशी देवी का जन्म हुआ था, जिन्होंने असुर मुरासुर का वध किया था। इसलिए यह दिन पापों से मुक्ति, शांति और भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन है।
उत्पन्ना एकादशी व्रत करने के लाभ
- घर में सुख-शांति बढ़ती है
- पापों का नाश होता है
- धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है
निष्कर्ष
तो साथियों, इस साल की उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर 2025 को है। जो भी भक्त इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद जरूर मिलता है। अगर आपके मन में कोई सवाल है, तो आप हमें कमेंट में जरूर बताएं। राधे-राधे प्रिय साथियों