पौष अमावस्या 2025: तिथि, महत्व, पूजन विधि, नियम और पितृ कृपा का रहस्य

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हिंदू धर्म में पौष अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यह वर्ष की अंतिम अमावस्या होती है, इसलिए इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नियमों का पालन करने से पितृ देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

पौष अमावस्या 2025 की तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार,
अमावस्या तिथि की शुरुआत शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को सुबह 5:00 बजे होगी
और समाप्ति शनिवार, 20 सितंबर 2025 को सुबह 7:12 बजे होगी।

उदया तिथि के अनुसार, पौष अमावस्या शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को ही मनाई जाएगी। इसी दिन श्राद्ध, तर्पण, दान-पुण्य और व्रत करने का विशेष महत्व है।

पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व

पौष अमावस्या विशेष रूप से पितरों को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किए गए कर्मों का सीधा संबंध हमारे पूर्वजों से होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए कार्य कई जन्मों तक शुभ फल प्रदान करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति पूरे विधि-विधान से पूजा न कर पाए, तो भी सिर्फ एक घी का दीपक जलाने मात्र से पितृ देवता प्रसन्न हो जाते हैं और जीवन की समस्याओं का निवारण होता है।

पितरों के लिए घी का दीपक जलाने की सही विधि

पौष अमावस्या के दिन दीपक जलाने के कुछ विशेष नियम होते हैं:

  • दीपक मिट्टी का होना चाहिए
  • उसमें लंबी बत्ती और शुद्ध देसी गाय का घी होना चाहिए
  • दीपक की बत्ती का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए

दीपक कहां जलाएं?

आप दीपक निम्न स्थानों में से किसी एक स्थान पर जला सकते हैं:

  • किसी पवित्र नदी के घाट पर
  • पीपल के पेड़ के नीचे
  • अपने घर में पीने के पानी के स्थान के पास

दीपक जलाते समय अपने पितरों का स्मरण करें और उनसे घर में चल रही परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें।

पौष अमावस्या के दिन क्या करें

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • घर के देवी-देवताओं को स्नान कराएं
  • तुलसी जी में जल अर्पित करें और परिक्रमा करें
  • घर के मुख्य द्वार पर दीपक जरूर रखें
  • पितरों की तस्वीर हो तो उसे साफ करके उनके सामने दीपक जलाएं
  • पूरे दिन सात्विक आचरण बनाए रखें

पौष अमावस्या के दिन क्या न करें

  • किसी का दिल न दुखाएं
  • झूठ, गाली-गलौज और गलत व्यवहार से बचें
  • मांसाहार, शराब, तंबाकू, गुटखा, लहसुन-प्याज का सेवन न करें
  • बाल और नाखून न काटें
  • दिन में न सोएं
  • यात्रा से बचें
  • विवाह, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत न करें
  • नया वाहन या कोई बड़ा सामान न खरीदें
  • तुलसी पत्र और बेलपत्र न तोड़ें (आवश्यकता हो तो एक दिन पहले तोड़ लें)

पौष अमावस्या पर दान-पुण्य का महत्व

इस दिन किया गया दान-पुण्य कई जन्मों तक फल देता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ या दक्षिणा देना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे पितृ दोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

निष्कर्ष

पौष अमावस्या वर्ष की अंतिम अमावस्या होने के कारण अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यदि इस दिन नियम, श्रद्धा और संयम के साथ पूजा-पाठ किया जाए, तो पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आने वाला नया वर्ष सुख-शांति से भर जाता है।

आशा है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही होगी। यदि आपके मन में अभी भी कोई प्रश्न हो, तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं।

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