मकर संक्रांति 2026 पर 14 दीपदान का महत्व, विधि और लाभ

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राधे राधे मेरे प्रिय साथियों।
आप सभी जानते हैं कि 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का दिन दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है, अर्थात इसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता और जीवन भर साथ रहता है।

मकर संक्रांति पर वैसे तो कई प्रकार के दान किए जाते हैं, लेकिन इन सभी में 14 दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन अन्य कोई दान न भी कर पाए, लेकिन श्रद्धा और नियम के साथ 14 दीपदान कर ले, तो उसके जीवन की बड़ी-से-बड़ी परेशानियां भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। साथ ही, सच्चे मन से की गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


14 दीपदान कौन कर सकता है?

इस दीपदान को घर की बड़ी माता या बहन द्वारा करना विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि श्रद्धा हो तो कोई भी यह दीपदान कर सकता है। दीपदान हमेशा शाम या रात्रि के समय ही करना चाहिए, क्योंकि दीपक जलाने का शुभ समय यही होता है।


14 दीपदान के लिए दीपक कैसे लें?

  • यदि संभव हो तो मिट्टी के नए दीपक लें
  • नए दीपक न मिलें तो पुराने दीपकों को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें
  • आप आटे के दीपक भी बना सकते हैं
  • आटे के दीपक बनाते समय नमक बिल्कुल न मिलाएं

सभी 14 दीपकों को एक थाली में एकत्र कर लें।


दीपक में कौन-सी बाती और तेल डालें?

  • आटे के दीपक में गोल बाती रखें
  • मिट्टी के दीपक में लंबी बाती रखें

तेल के लिए:

  • सबसे उत्तम है तिल्ली का तेल
  • इसके अलावा सरसों का तेल या शुद्ध देसी गाय का घी भी प्रयोग कर सकते हैं

तेल डालने के बाद हर दीपक में थोड़े-थोड़े काले तिल अवश्य डालें।
यदि काले तिल उपलब्ध न हों तो सफेद तिल भी डाल सकते हैं, लेकिन तिल डालना अनिवार्य है।


मकर संक्रांति पर 14 दीपदान की संपूर्ण विधि

मकर संक्रांति की शाम या रात में एक-एक करके 14 दीपक जलाएं:

  1. पहला दीपक – घर के पूजा स्थान में सभी देवी-देवताओं के लिए
  2. दूसरा दीपक – रसोई घर में माता अन्नपूर्णा के लिए
  3. तीसरा दीपक – पीने के पानी के स्थान के पास, दक्षिण दिशा में पितरों के नाम
  4. चौथा दीपक – तुलसी माता के पौधे के पास
  5. पांचवां दीपक – घर की दहलीज या मुख्य द्वार पर
  6. छठा दीपक – किसी पवित्र नदी, कुएं, बावड़ी या तालाब के पास
  7. सातवां दीपक – बेलपत्र के वृक्ष के नीचे
  8. आठवां दीपक – पीपल के वृक्ष के नीचे
  9. नौवां दीपक – आंवले के वृक्ष के नीचे

(बेल, पीपल और आंवला – ये तीनों वृक्ष देवतुल्य माने जाते हैं)

  1. दसवां दीपक – किसी शिव मंदिर में
  2. ग्यारहवां दीपक – गौशाला या गौ माता के लिए
  3. बारहवां दीपक – यज्ञशाला या यज्ञ कुंड के पास
  4. तेरहवां दीपक – वटवृक्ष के नीचे
  5. चौदहवां दीपक – घर के बाहर किसी कोने में (घर के अंदर नहीं)

यदि सभी स्थानों पर जाना संभव न हो तो क्या करें?

यदि किसी कारणवश सभी स्थानों पर जाना संभव न हो, तो मन में पूर्ण श्रद्धा रखते हुए घर के बाहर दीवार के पास दीपक रख सकते हैं। भाव ही सबसे बड़ा मंत्र होता है।


दीपदान के बाद क्या करें?

अगले दिन घर में रखे गए दीपकों का विसर्जन किसी नदी या पवित्र स्थान पर कर दें। इस प्रकार आपका 14 दीपदान पूर्ण होता है।

यह जरूरी नहीं है कि दीपक उसी क्रम में ही जलाए जाएं, जैसा बताया गया है। आप क्रम आगे-पीछे कर सकते हैं, लेकिन घर के दीपक सबसे पहले जलाना शुभ माना जाता है


निष्कर्ष

मकर संक्रांति 2026 पर किया गया 14 दीपदान जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ किया गया यह उपाय निश्चित रूप से शुभ फल देता है।

यदि आपके मन में अभी भी कोई प्रश्न हो, तो कमेंट करके जरूर पूछें, और यह भी बताएं कि आप यह लेख कहां से पढ़ रहे हैं।

राधे राधे मेरे प्रिय साथियों 🙏

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