राधे राधे मेरे प्रिय साथियो, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी को हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष माना जाता है। इस एकादशी का व्रत करने से भक्तों को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह होली से कुछ दिन पहले आती है।
आमलकी एकादशी 2026 की तिथि और व्रत का दिन
आमलकी एकादशी की तिथि वर्ष 2026 में 26 फरवरी, गुरुवार की देर रात 12 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी और 27 फरवरी, शुक्रवार की रात 10 बजकर 33 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में आमलकी या रंगभरी एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।
आमलकी एकादशी व्रत पारण की तिथि और हरिवासर समय
जो भक्त आमलकी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में करना चाहिए। वर्ष 2026 में व्रत का पारण 28 फरवरी, शनिवार को किया जाएगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि हरिवासर काल में एकादशी व्रत का पारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आमलकी एकादशी में हरिवासर का समय 28 फरवरी 2026 को सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
आमलकी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
आमलकी एकादशी व्रत पारण का शुभ समय 28 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर सुबह 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस समय के दौरान भक्त व्रत का पारण कर सकते हैं।
आमलकी एकादशी के बाद महा द्वादशी का महत्व
इस वर्ष आमलकी एकादशी के बाद महा द्वादशी भी पड़ रही है। महा द्वादशी के दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की विशेष पूजा की जाती है। कुछ भक्त इस दिन भी व्रत रखते हैं और भगवान नरसिंह की आराधना करते हैं।
आमलकी एकादशी व्रत के नियम
जो भक्त आमलकी एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें दशमी तिथि के दिन एक समय भोजन करना चाहिए और शाम से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और पूरे दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। शाम के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा कर घी का दीपक जलाना चाहिए।
व्रत पारण की विधि और आंवले का महत्व
द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के दौरान व्रत का पारण करना चाहिए। व्रत पारण के लिए विशेष रूप से आंवले का प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना गया है। आप गंगाजल या भगवान के प्रसाद के माध्यम से भी व्रत खोल सकते हैं। व्रत खोलने के बाद भी इस दिन शुद्ध और सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
आमलकी एकादशी में आंवले के वृक्ष की पूजा
आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए और भगवान विष्णु को आंवले का भोग अर्पित करना चाहिए। दशमी और एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है, जबकि द्वादशी तिथि में व्रत पारण के बाद चावल का सेवन किया जा सकता है।
निष्कर्ष
इस प्रकार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि आपके मन में आमलकी एकादशी 2026 से संबंधित कोई प्रश्न है, तो आप कमेंट करके अवश्य पूछ सकते हैं।
राधे राधे