21 सितंबर पितृपक्ष अमावस्या 1 चावल की कटोरी वाला उपाय | कपूर कितने बजे जलाना है

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पितृपक्ष की अमावस्या का दिन पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन किया गया एक छोटा सा उपाय आपके जीवन से सारी नकारात्मकता हटाकर सुख, शांति और समृद्धि ला सकता है। आइए जानते हैं इस विशेष और आसान उपाय की पूरी विधि।

उपाय का समय और तिथि

  • यह उपाय सिर्फ 21 सितंबर, पितृपक्ष अमावस्या के दिन ही किया जाना है।
  • सर्वोत्तम समय: शाम 6:00 बजे से 7:00 बजे के बीच।
  • अन्य समय: यदि संभव न हो, तो शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे के बीच या रात 10:00 बजे से पहले अवश्य कर लें (क्योंकि इसके बाद सूर्य ग्रहण लगने वाला है)।

सामग्री की तैयारी

  • एक खाली कटोरी: सामान्य स्टील या प्लास्टिक की।
  • कच्चे चावल: अपने ही रसोई घर के। बाहर से नए लेने की जरूरत नहीं है।
  • कपूर: बाजार से टुकड़े वाला या गोली वाला कपूर ले सकते हैं।

विधि: Step-by-Step Guide

शाम को करें यह काम

  • घर की कोई एक महिला या पुरुष रसोई घर से एक मुट्ठी कच्चे चावल ले।
  • एक कटोरी में ये चावल भर दें।
  • चावलों के बीच में एक कपूर का टुकड़ा रख दें (थोड़ा अधिक रखें ताकि यह उड़ने न पाए)।
  • अब इस कटोरी को अपने घर के मुख्य दरवाजे के बाहर, थोड़ा सा बाहर की ओर रख दें।
  • ध्यान रखें कटोरी को कुत्ते, बिल्ली या कोई जानवर नुकसान न पहुंचाए। इसे ईंट से ढक दें या दीवार पर ऊंचा रख दें।
  • कटोरी रखने के बाद, घर का कोई भी सदस्य रात भर घर से बाहर न निकले।

अगली सुबह करें यह काम (नवरात्रि के पहले दिन)

  • सुबह सूर्योदय के बाद जल्दी उठें और स्नान करें।
  • एक माचिस लेकर सीधे दरवाजे पर जाएं जहाँ कटोरी रखी है।
  • बिना कटोरी को हाथ लगाए, माचिस से कपूर जला दें।
  • कपूर जलते समय भगवान और अपने पितरों (पूर्वजों) का ध्यान करें। उनसे अपनी गलतियों के लिए माफ़ी मांगें और मनोकामना मांगें।
  • जब कपूर पूरी तरह जलकर बुझ जाए, तो कटोरी उठाएं।

अंतिम और महत्वपूर्ण चरण

  • अब इस कटोरी को लेकर घर के पास किसी बड़े पेड़ के नीचे जाएं।
  • सारे चावल वहाँ जमीन पर फैला दें, ताकि पक्षी उन्हें चुग सकें।
  • शहर में रहने वाले लोग: अगर पेड़ नहीं है, तो छत या बालकनी में ऐसी जगह चावल डालें जहाँ पक्षी आसानी से आ सकें।
  • एक बार फिर से पितरों का धन्यवाद और प्रार्थना करें।
  • कटोरी को वहीं न छोड़ें, उसे अपने साथ घर वापस ले आएं।

इस उपाय के लाभ (Benefits)

  • पितृ दोष से मुक्ति: अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना हो जाती है।
  • पितरों का आशीर्वाद: पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
  • घर में बरकत: सुख, शांति और धन की कभी कमी नहीं होती।
  • समस्याओं का समाधान: चल रही परेशानियों और रुकावटों में कमी आती है।

निष्कर्ष

पितृपक्ष अमावस्या का यह उपाय बेहद शक्तिशाली और प्रभावी है। इसे सही विधि और श्रद्धा से करने पर अवश्य ही लाभ मिलता है। इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें।

श्री शिवाय नमः

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