एकादशी व्रत की सही विधि, नियम और महत्व – पूरी जानकारी | Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi

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राधे राधे मेरे प्रिय साथियो,
हर महीने दो बार आने वाली एकादशी तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। आप में से अधिकतर लोग एकादशी का व्रत जरूर रखते होंगे, लेकिन कई बार व्रत सही तरीके से न करने पर उसका फल नहीं मिल पाता। इस लेख में हम आपको एकादशी व्रत रखने की विधि, नियम, महत्व और पारण (व्रत खोलने की प्रक्रिया) की पूरी जानकारी देने वाले हैं।


Table of Contents

एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है?

एकादशी व्रत भगवान विष्णु जी को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

आप किसी भी एकादशी से व्रत की शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी से व्रत शुरू करना सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि इसी दिन यह व्रत प्रारंभ हुआ था।


व्रत शुरू करने से पहले संकल्प क्यों जरूरी है?

एकादशी व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लिया जाता है कि आप यह व्रत किस मनोकामना के लिए कर रहे हैं।
साथ ही यह भी संकल्प लिया जाता है कि जब तक मनोकामना पूरी न हो जाए, व्रत नहीं छोड़ेंगे।

कुछ लोग पूरे वर्ष की एकादशियाँ रखते हैं और कुछ जीवनभर भी यह व्रत करते हैं। यह पूरी तरह साधक की इच्छा पर निर्भर है।


एकादशी व्रत रखने से पहले पालन करने योग्य नियम (दशमी के दिन)

एकादशी से एक दिन पहले आने वाली दशमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है।

1. दशमी के दिन केवल एक समय भोजन करें

इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, शराब आदि) बिल्कुल न करें।

2. इन चीज़ों का त्याग करें:

  • प्याज-लहसुन
  • चावल
  • मसूर की दाल
  • तामसिक भोजन
  • पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन

3. दशमी की रात दांत जरूर साफ करें

एकादशी के दिन दातुन (टहनी, पत्ते) का उपयोग वर्जित है, इसलिए रात में ही दांत साफ कर लें।

4. दशमी को तुलसी पत्र तोड़कर रख लें

क्योंकि एकादशी और द्वादशी को तुलसी पत्र तोड़ना मना है।


एकादशी व्रत वाले दिन पालन करने योग्य महत्वपूर्ण नियम

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा शुरू करें।

2. झाड़ू-पोछा, नाखून और बाल काटना वर्जित

क्योंकि इससे अनजाने में किसी जीव की मृत्यु हो सकती है।

3. दोपहर में सोना नहीं चाहिए

दोपहर में सोने से व्रत का फल कम हो जाता है।

4. कम बोलें—मौन और शांति रखें

अधिक बोलने से मन एकाग्र नहीं रहता।

5. किसी से दिया गया भोजन न खाएं

व्रती को केवल घर का बना हुआ फलाहार ही स्वीकार करना चाहिए।


एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं? (फलाहार सूची)

व्रती इन चीज़ों का सेवन कर सकते हैं:

  • फल
  • कुट्टू का आटा
  • साबूदाना
  • आलू
  • शकरकंद
  • दूध, दही
  • नारियल पानी
  • बादाम
  • सेंधा नमक
  • अदरक, काली मिर्च

एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए?

इन चीज़ों का सेवन बिल्कुल वर्जित माना गया है:

  • चावल
  • गेहूं, मैदा
  • उड़द की दाल
  • बाजरा
  • मसूर
  • मटर, छोले
  • गोभी, पालक, गाजर
  • हींग, सरसों, मैथी
  • इमली, लौंग, जायफल
  • बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा
  • बाहर की मिठाई

एकादशी की पूजा विधि

गवान विष्णु को स्नान कराएं

पीले वस्त्र पहनाएं और पीले फूल चढ़ाएं।

तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं

लेकिन खुद न तोड़ें—दशमी को तोड़कर रखे हुए ही प्रयोग करें।

मंत्र जाप करें

पूरे दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें।

शाम को दीपक जलाएं

तुलसी माता के पास गाय के घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।


एकादशी व्रत कैसे खोलें? (पारण विधि)

व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है:

पारण नियम:

  • सूर्योदय के बाद 3–4 घंटों के भीतर
  • हरी वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में पारण न करें

पारण कैसे करें?

  • स्नान करके विष्णु जी की पूजा करें
  • क्षमा प्रार्थना करें
  • दाहिने हाथ से 7 घूंट जल और 7 चने सेवन करके व्रत खोलें
  • फिर केवल सात्विक भोजन करें

द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन, मिष्ठान और दक्षिणा देना अत्यंत शुभ माना गया है।


एकादशी व्रत उद्यापन कब करें?

जब आपकी मनोकामना पूरी हो जाए, तो मोक्षदा एकादशी के दिन उद्यापन करना शुभ माना जाता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

इस लेख में हमने आपके साथ एकादशी व्रत की पूरी विधि, नियम, भोजन सूची और पारण प्रक्रिया विस्तार से साझा की है। यदि आप इन नियमों का सही तरीके से पालन करते हैं, तो आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।

अगर आपके मन में किसी भी प्रकार का प्रश्न हो, तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं।

राधे राधे मेरे प्रिय साथियो।

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