सावन में पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाएं | Parthiv Shivling Kaise Banae

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नमस्कार दोस्तों, आप सभी लोग जानते हैं कि सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग बनाने का हमें कितना बड़ा फल मिलता है पर सावन के महीने में जब भी आप पार्थिव शिवलिंग बनाते हैं तो उसकी एक विधि होती है और उसको विसर्जन करने का भी एक समय होता है और उसकी भी एक पूजन विधि होती है। जिसकी सारी जानकारी हम आपको आज देने वाले हैं। अगर आप लोग भी सावन महीने में सावन सोमवार के व्रत रखते हैं या सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करते हैं तो आपको यह जानकारी जरूर जानी चाहिए।

सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग कब बनाएं

सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग बनाने का कोई समय या कोई दिन नहीं होता। सावन के महीने में आप किसी भी दिन पार्थिव शिवलिंग बना सकते हैं या विशेष रूप से सावन सोमवार को आप लोगों को पार्थिव शिवलिंग का निर्माण जरूर करना चाहिए।

सावन में पार्थिव शिवलिंग किस समय बनाएं

सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाने का समय सुबह से लेकर शाम तक के बीच का है। इस बीच में आपको पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजन अर्चना करके उसका विसर्जन भी करना होता है।

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए कौन सी मिट्टी का उपयोग करें

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए आपको काली मिट्टी का प्रयोग मुख्य रूप से करना चाहिए।

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए मिट्टी कहां से लें

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए आप लोग मिट्टी कहीं बाहर से भी लेकर आ सकते हैं लेकिन मिट्टी लाने से पहले आपको यह देखना होगा कि जहां से आप मिट्टी ला रहे हैं वह जगह शुद्ध होनी चाहिए और अगर आप चाहे तो अपने ही घर के गमले से भी मिट्टी ले सकते हैं और उसका भी पार्थिव शिवलिंग बना सकते हैं।

सावन में पार्थिव शिवलिंग की मिट्टी लाने के बाद क्या करें

सावन के महीने में जब आप पार्थिव शिवलिंग की मिट्टी को अपने घर में लेकर आए तो सबसे पहले मिट्टी को अपने घर में लाकर उसके ऊपर जल का छिड़काव जरूर करें या गंगाजल का छिड़काव करें या बेलपत्र एक जल पात्र के अंदर डालकर उस जल से जरूर उस मिट्टी का सीजन कर दें। यह पार्थिव शिवलिंग बनाने से पहले का नियम होता है।

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए कौन सी जल का उपयोग करें

जब आप पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे तो उसमें आपको जल की आवश्यकता जरूर पड़ती है। यह जल को आपको दो-तीन घंटे पहले तैयार करके रखना पड़ता है जिसमें एक लोटे के अंदर जल भरकर उसके ऊपर कोई कटोरी ढाककर उस कटोरी के ऊपर एक चावल का दाना रखकर फिर इस जल के लोटे को आपको अपने ही घर की रसोई घर में जाकर पीने के पानी वाले स्थान के पास में रख देना होता है। अब इस जल के अंदर पितरों का भाव आ जाएगा, अन्नपूर्णा का भाव आ जाएगा, लक्ष्मी जी का भाव आ जाएगा, 33 कोटि देवताओं का भाव आ जाएगा। जब आप इस जल से पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे तो आपके इस पार्थिव शिवलिंग में इन सभी का भाव आ जाएगा।

सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि

सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि कुछ इस प्रकार से है।

  • सबसे पहले आपको पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए कोई बर्तन लेना होता है जिसके अंदर आप पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे।
  • अब आप उस बर्तन के अंदर सबसे पहले एक बेलपत्र को रखिए क्योंकि शिवलिंग का भार बेलपत्र के अलावा कोई और नहीं झेल सकता है।
  • बेलपत्र का चिकना भाग ऊपर करके रखना है और बेलपत्र की डंडी का भाग उत्तर दिशा की तरफ करके आपको बेलपत्र को बर्तन के अंदर जमाना है।
  • अब आप अपनी वह गलाई हुई मिट्टी को डाल दीजिए।
  • सबसे पहले अब आप पहले शिवलिंग का आकार बनाएं। पहले शिवलिंग का आकार बनेगा जलाधारी बाद में बनेगी।
  • अब आप थोड़ी और मिट्टी शिवलिंग के आसपास डालकर जलधारी का निर्माण कर लें।
  • अब आपका पार्थिव शिवलिंग बनाकर तैयार हो जाएगा।

सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा विधि

सावन के महीने में जब भी आप पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजन करें तो आपको वैसे ही पूजन करना है जैसे आप शिव जी के मंदिर में जाकर शिवजी की पूजन अर्चना करते हैं। जैसे शिवजी पर जल चढ़ाते हैं, फूल चढ़ाते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं, दीपक लगाते हैं और उनकी आरती उतारते हैं वैसे ही आपको सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा रचना करना है।

सावन में पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कैसे करें

  • सावन में पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन आप लोगों को उसी दिन करना चाहिए। जिस दिन आपने पार्थिव शिवलिंग बनाया हुआ है। कहने का मतलब यह है कि शाम होने से पहले आपका पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजन अर्चना कर देना चाहिए और विसर्जन भी हो जाना चाहिए।
  • अगर आप पार्थिव शिवलिंग को पूरी रात रखना चाहते हैं तो इसकी कुछ तिथिया होती है जैसे शिवरात्रि, हरियाली तीज, बड़ी तीज जैसे स्थितियों पर आप पार्थिव शिवलिंग को रात भर रख सकते हैं। इसके अलावा और दिनों में आपको शाम होने से पहले पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कर देना होता है।
  • जब आप पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन करें तो जिस तरफ बेलपत्र की डंडी है जो आपने शिवलिंग बनाने से पहले पात्र में रखी हुई थी वह डंडी वाला भाग आपकी तरफ होना चाहिए। मतलब जिस तरफ जलाधारी है वह आपकी तरफ होना चाहिए।
  • जब आप विसर्जन करें तो उस जलधारी के भाग को देखकर ही विसर्जन करें और अपनी जो भी मनोकामना हो वह जरूर बोल दें।

सावन में पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कहां करें

सावन में पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन आप अपने घर में भी कर सकते हैं और बाहर किसी पवित्र नदी में जाकर भी कर सकते हैं। अगर आप अपने घर में शिवलिंग का विसर्जन कर रहे हैं तो एक बड़े से पात्र के अंदर शुद्ध जल भरकर उसके अंदर पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन करें। अन्यथा आप किसी पवित्र नदी के घाट पर जाकर जल के अंदर जाकर पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कर सकते हैं।

हमने आपको सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग बनाने से लेकर विसर्जन करने तक की विधि समझा दी है। अगर आपके मन में अभी भी कोई प्रश्न है तो आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं।
ओम नमः शिवाय

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