राधे राधे मेरे प्रिय साथियों,
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली षटतिला एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस वर्ष षटतिला एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी दिन मकर संक्रांति का पावन पर्व भी पड़ रहा है, जो कई वर्षों बाद बना एक दुर्लभ संयोग है।
षटतिला एकादशी के दिन काली तिल (Black Sesame Seeds) का विशेष धार्मिक महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तिल से किए गए दान और कर्म पितरों को तृप्त करते हैं और साधक के जीवन से दरिद्रता, पाप और कष्ट दूर करते हैं।
षटतिला एकादशी का नाम क्यों पड़ा?
षटतिला एकादशी में काली तिल के 6 प्रकार से उपयोग किए जाते हैं। इन्हीं छह उपयोगों के कारण इस एकादशी का नाम “षटतिला” पड़ा है।
षटतिला एकादशी पर काली तिल के 6 प्रमुख उपयोग
- काली तिल को जल में डालकर स्नान करना
- काली तिल का दान करना
- काली तिल से पितरों का तर्पण करना
- काली तिल से हवन करना
- काली तिल से बने लड्डुओं का सेवन करना
- तिल से उबटन करना
इन छह कर्मों से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और समय
एकादशी तिथि
- प्रारंभ: 13 जनवरी 2026, मंगलवार – दोपहर 3:18 बजे
- समाप्ति: 14 जनवरी 2026, बुधवार – शाम 5:53 बजे
👉 सभी पंचांग नियमों के अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
इसमें किसी प्रकार का कोई भ्रम नहीं है।
द्वादशी तिथि और व्रत पारण समय
द्वादशी तिथि
- प्रारंभ: 14 जनवरी 2026 – शाम 5:54 बजे
- समाप्ति: 15 जनवरी 2026 – रात 8:16 बजे
षटतिला एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
- 15 जनवरी 2026, गुरुवार
- सुबह 7:15 बजे से 9:21 बजे तक
व्रतधारी को द्वादशी तिथि में ही पारण करना अनिवार्य होता है।
दशमी, एकादशी और द्वादशी के नियम
दशमी तिथि (13 जनवरी 2026 – मंगलवार)
- एक समय ही भोजन करें
- प्याज और लहसुन का सेवन न करें
- तुलसी पत्र इस दिन तोड़कर रख लें, क्योंकि एकादशी और द्वादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती
षटतिला एकादशी व्रत विधि (पूजा विधि)
- एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- गंगाजल और काली तिल मिले जल से स्नान करें
- भगवान विष्णु को स्नान कराकर व्रत का संकल्प लें
- पूरे दिन
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
मंत्र का जाप करें - व्रत में फलाहार, चाय या जल ग्रहण किया जा सकता है
- सायंकाल स्नान या हाथ-मुख धोकर
- भगवान विष्णु
- माता लक्ष्मी
की विधिवत पूजा करें
- घी का दीपक जलाकर विशेष आराधना करें
व्रत पारण विधि
- द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में
- गंगाजल से व्रत खोलें
- सबसे पहले काली तिल और गुड़ से बने लड्डुओं का सेवन करें
- इसके बाद ही अन्य भोजन ग्रहण करें
मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का विशेष संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति भी 14 जनवरी को ही पड़ रही है, लेकिन चूंकि यह दिन एकादशी का है:
- ❌ चावल का दान नहीं करें
- ❌ चावल की खिचड़ी न बनाएं
- ✅ साबूदाने की खिचड़ी बना सकते हैं
- ✅ काली तिल और गुड़ से बने लड्डुओं का दान करें
एकादशी होने के कारण चावल से संबंधित दान और भोजन वर्जित रहता है।
षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व
- पितृ दोष से मुक्ति
- धन-समृद्धि की प्राप्ति
- पापों का नाश
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा
- जीवन के संकटों से राहत
निष्कर्ष
षटतिला एकादशी 2026 अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी है, क्योंकि इस दिन मकर संक्रांति का शुभ संयोग भी बन रहा है। यदि श्रद्धा और विधि-विधान से काली तिल का उपयोग कर यह व्रत रखा जाए, तो जीवन में सुख-समृद्धि और शांति अवश्य प्राप्त होती है।
🙏 आप सभी को षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
राधे राधे मेरे प्रिय साथियों।