पूजा करते समय कभी न करें ये 13 गलतियाँ – नहीं मिलेगा पूजा का फल | Pooja Ke 13 Mistake

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राधे राधे मेरे प्रिय साथियो, हम सभी अपने घर में रोजाना भगवान की पूजा करते हैं ताकि हमारे घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम पूजा तो करते हैं, फिर भी मनचाहा फल नहीं मिलता, जीवन में परेशानियाँ बढ़ती जाती हैं और हमारे मन में एक सवाल आ जाता है—आखिर हमारी पूजा सफल क्यों नहीं हो रही?

इसका सबसे बड़ा कारण है पूजा के समय की जाने वाली 13 आम गलतियाँ, जो अधिकतर लोग अनजाने में कर देते हैं। इन गलतियों की वजह से पूजा का फल कम हो जाता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

अगर आप भी अपनी पूजा को सफल बनाना चाहते हैं, तो इन 13 गलतियों को तुरंत सुधार लें।


Table of Contents

गलत समय पर पूजा करना

  • सुबह की पूजा ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के समय तक कर लेनी चाहिए।
  • अगर देर भी हो जाए तो सुबह 8 बजे से पहले पूजा ज़रूर कर लें।
  • शाम की पूजा या दीया-बाती रात होने से पहले करनी चाहिए।
  • अंधेरा होने के बाद की गई दीया-बाती शुभ नहीं मानी जाती।

भगवान को स्नान कराए हुए जल को तुलसी में डालना

जिस जल से आप अपने घर के भगवानों को स्नान कराते हैं, उसे तुलसी के पौधे में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि शिवजी का जल तुलसी पर चढ़ाना दोष माना जाता है। यह पानी किसी अन्य पौधे में डाल दें और तुलसी में अलग से जल चढ़ाएँ।


दीपक जलाने के बाद जली हुई तीली भगवान के सामने फेंकना

दीपक जलाने के बाद माचिस की तीली को अनदेखा करके भगवान के सामने फेंक देते हैं।
यह अशुभ माना गया है। तीली को एक कोने में अलग रखें।


दीपक को रोज साफ किए बिना जलाना

कई लोग दीपक की पुरानी बत्ती निकालकर नई बत्ती डाल देते हैं, लेकिन दीपक को साफ नहीं करते। जैसे आप रोज भगवान को स्नान कराते हैं, वैसे ही दीपक को भी रोज साफ करके ही जलाना चाहिए


पूजा की घंटी को गलत तरीके से बजाना

  • घंटी को लगातार बजाना या तेज़ ताकत से बजाना ठीक नहीं है।
  • पूजा के समय घंटी को केवल 5 से 7 बार बजाएँ।
  • अगर आरती हो रही है तो आरती खत्म होने तक मधुर स्वर में बजाएँ।

एक ही भगवान की कई मूर्तियाँ या फोटो रखना

घर के मंदिर में एक ही भगवान की कई तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए। जितने भगवानों की आप रोज सेवा कर सके, उतने ही रखें। मूर्तियों और फोटो को रोज कपड़े से साफ करना भी ज़रूरी है।


पितरों की फोटो को पूजा घर में रखना

  • भगवान की पूजा अलग होती है और पितरों की उपासना अलग।
  • पूजा घर में पितरों की तस्वीरें बिलकुल भी नहीं रखनी चाहिए।
  • उन्हें पूजा घर से दूरी पर लगाएँ।

बिना आसन के पूजा करना

जमीन पर सीधे बैठकर पूजा करना अशुभ माना जाता है। हमेशा कुशा, ऊन या कपड़े के आसन पर बैठकर ही पूजा करें।


लड्डू गोपाल को तुलसी पत्र न चढ़ाना

अगर घर में तुलसी का पौधा है, तो लड्डू गोपाल को रोज तुलसी पत्र अर्पित करें।
इससे तुलसी माता और लड्डू गोपाल दोनों प्रसन्न होते हैं।


गलत दिन पर तुलसी को छूना या पानी देना

रविवार, बुधवार और एकादशी को तुलसी को
❌ पानी नहीं देना चाहिए
❌ पत्तियाँ नहीं तोड़नी चाहिए

अगर किसी काम के लिए तुलसी पत्र चाहिए तो एक दिन पहले तोड़कर रख लें।


पूजा के बीच-बीच में बार-बार उठना

पूजा करते समय बीच में उठना अशुभ माना जाता है।
पूजा सामग्री पहले से अपने पास रखें और पूजा खत्म करके ही उठें।


पहले मंदिर जाना और बाद में घर की पूजा करना

  • सबसे पहले घर की पूजा करनी चाहिए।
  • सुबह स्नान करके अपने घर के भगवानों को पूजन कर लें, उसके बाद मंदिर जाएँ।
  • यह क्रम अधिक शुभ माना गया है।

पूजा स्थल की सफाई न करना

  • भगवान के मंदिर, उनके आस-पास और नीचे की जगह को साफ रखना बेहद ज़रूरी है।
  • अगरबत्ती की राख, दीपक की कालिख और धूल जमा होने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • पूजा स्थान को रोज साफ करें।

निष्कर्ष

हमने आपको पूजा में की जाने वाली 13 सबसे बड़ी गलतियाँ बता दी हैं।
हो सकता है कि आप इनमें से कोई एक, दो या कई गलती कर रहे हों।
इन्हें आज ही सुधार लें, और आप अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और ईश्वर का आशीर्वाद महसूस करेंगे।

अगर पूजा से जुड़ा कोई भी प्रश्न है, तो आप हमें कमेंट में पूछ सकते हैं।
राधे राधे मेरे प्रिय साथियो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: क्या शाम 7 बजे पूजा कर सकते हैं?

A: शाम की पूजा सूर्यास्त से पहले करना उत्तम है। यदि संभव न हो तो संध्या के समय करें।

Q: तुलसी में किस देवता का जल डाल सकते हैं?

A: विष्णु जी, कृष्ण जी और राम जी का जल तुलसी में डाल सकते हैं।

Q: पूजा में कौन सा आसन सबसे अच्छा है?

A: ऊन, कुशा या सूती आसन सर्वोत्तम हैं। प्लास्टिक या रबर के आसन न उपयोग करें।

Q: क्या एक से अधिक शिवलिंग रख सकते हैं?

A: हाँ, लेकिन सभी की नियमित सफाई और पूजा करना आवश्यक है।

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